ताज पर नज़र की जीत: एसआरएफटीआई के पूर्व छात्र शेहनाद जलाल को सर्वश्रेष्ठ छायांकन के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

SRFTI Alumnus Shehnad Jalal Receives National Film Award for Best Cinematography

नज़र का ताज: एसआरएफटीआई के पूर्व छात्र शेहनाद जलाल को सर्वश्रेष्ठ छायांकन के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एसआरएफटीआई) अपने पूर्व छात्र शेहनाद जलाल की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व का अनुभव करता है। फिल्म ‘ब्रह्मयुगम’, जिसका निर्देशन राहुल सदाशिवन ने किया है, में उनके उत्कृष्ट छायांकन के लिए उन्हें 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2026 में सर्वश्रेष्ठ छायांकन (Best Cinematography) का सम्मान प्राप्त हुआ है।

एसआरएफटीआई के छायांकन विभाग के चौथे बैच के स्नातक शेहनाद जलाल ने अपनी विशिष्ट दृश्यात्मक अभिव्यक्ति, कलात्मक सूक्ष्मता और तकनीकी उत्कृष्टता के बल पर भारतीय सिनेमा में एक उल्लेखनीय पहचान बनाई है। ‘ब्रह्मयुगम’ में उनका पुरस्कार-विजेता छायांकन प्रकाश, फ्रेम-संयोजन और कैमरा-गतियों के प्रभावशाली उपयोग के माध्यम से दर्शकों के लिए एक गहन और सजीव सिनेमाई अनुभव का सृजन करता है। यह प्रतिष्ठित सम्मान न केवल उनकी असाधारण प्रतिभा का प्रमाण है, बल्कि यह भी रेखांकित करता है कि उत्कृष्ट छायांकन किस प्रकार कहानी कहने की कला को नई कलात्मक ऊँचाइयों तक पहुँचाता है।

एसआरएफटीआई के लिए यह उपलब्धि उसकी उस गौरवशाली परंपरा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिसके अंतर्गत संस्थान ने अनेक सफल फिल्मकारों, छायाकारों और रचनात्मक पेशेवरों को तैयार किया है। शेहनाद की सफलता विश्वस्तरीय फिल्म शिक्षा, उन्नत छायांकन प्रशिक्षण और व्यावहारिक फिल्म निर्माण अनुभव प्रदान करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करती है, जिससे विद्यार्थी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित और सक्षम बनते हैं।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा में उत्कृष्टता के लिए देश का सर्वोच्च सम्मान है, जो फिल्म निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान को मान्यता प्रदान करता है। शेहनाद जलाल की यह उपलब्धि उनके वर्षों के समर्पण, रचनात्मक दृष्टि और सिनेमाई उत्कृष्टता की निरंतर साधना का प्रतिबिंब है।

हार्दिक बधाई, शेहनाद जलाल।आपकी यह उल्लेखनीय उपलब्धि सम्पूर्ण एसआरएफटीआई परिवार के लिए गर्व का विषय है और यह इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि जुनून, निरंतर परिश्रम और रचनात्मक उत्कृष्टता किस प्रकार सिनेमा के भविष्य को नई दिशा प्रदान कर सकती है।